Hello friends ...
ज़िन्दगी को जीतने के लिए कठीण संघर्ष करना होगा ये
तो तय है ! लोग कहते है की ६० -७० साल ही तो १००० रूपये रोज कुमान बाले जीते है और ६० - ७० साल ही १०० रोज कुमान बाले जीते है. तो क्यों मरे धन के लालच में ?
लेकिन ये गलत है ! इंसान जितनी बड़ी सोच रखेगा उतनी ही बाड़ी साफलता पायेगा ! सोच बड़ी रखो तो बड़े बनने के थोड़े आसार नज़र आते है !
किसी ने क्या खूब कहा है। ......
हर सपने को अपनी आखो में रखो !!
हर मंज़िल को अपनी बाहो में राखो !
हर जीत हो सकती है आपकी !!
बस अपने लक्छ्य को अपनी निगाहों में रखो !
किसी भी चीज़ को ले लो यदि उस पर मेहनत करते है तो
उस चीज़ का आकार बादल जाता है जैसे के। ......
*दूध को दुखी करो तो दही बनता है|
*दही को सताने से मक्खन बनता है|*
*मक्खन को सताने से घी बनता है|*
*दूध से महंगा दही है,दही से महंगा मक्खन है,और मक्खन से महंगा घी है|*
*किन्तु इन चारों का रंग एक ही है सफेद|*
*इसका अर्थ है बाऱ- बार दुख और संकट आने पर भी जो इंसान अपना रंग नहीं बदलता,समाज में उसका ही मूल्य बढ़ता है|*
: जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है
मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ। ...... हासिल कहाँ नसीब
से होती हैं।
......मगर वहाँ तूफान भी
हार जाते हैं।
..जहाँ किश्तियाँ जिद
पर होती हैँ।
"दु:ख" और "तकलीफ"
खुदा की बनाई हुई
वह प्रयोगशाला है l
जहां आपकी काबलियत
और आत्मविश्वास को
परखा जाता है l
यदि आप किसी चीज के बारे में सोचने में बहुत अधिक समय लगाते हैं , तो आप उसे कभी कर नहीं पाएंगे।
*जीवन" में "तकलीफ़" उसी को आती है, जो हमेशा "जवाबदारी" उठाने को तैयार रहते है,*
*और जवाबदारी लेने वाले कभी हारते नही, या तो "जीतते" है, या फिर "सिखते" है.*
*अभिमन्यु की एक बात बड़ी शिक्षा देतीं हैं ...*
*" हिम्मत से हारना,*
*पर*
*हिम्मत मत हारना "...*
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।
*क्या खूब लिखा है किसी ने-*
*लाख दलदल हो,*
*पाँव जमाए रखिये;*
*हाथ खाली ही सही,*
*ऊपर उठाये रखिये;*
*कौन कहता है छलनी में,*
*पानी रुक नहीं सकता;*
*बर्फ बनने तक,*
*हौसला बनाये रखिये
ज़िन्दगी को जीतने के लिए कठीण संघर्ष करना होगा ये
तो तय है ! लोग कहते है की ६० -७० साल ही तो १००० रूपये रोज कुमान बाले जीते है और ६० - ७० साल ही १०० रोज कुमान बाले जीते है. तो क्यों मरे धन के लालच में ?
लेकिन ये गलत है ! इंसान जितनी बड़ी सोच रखेगा उतनी ही बाड़ी साफलता पायेगा ! सोच बड़ी रखो तो बड़े बनने के थोड़े आसार नज़र आते है !
किसी ने क्या खूब कहा है। ......
हर सपने को अपनी आखो में रखो !!
हर मंज़िल को अपनी बाहो में राखो !
हर जीत हो सकती है आपकी !!
बस अपने लक्छ्य को अपनी निगाहों में रखो !
किसी भी चीज़ को ले लो यदि उस पर मेहनत करते है तो
उस चीज़ का आकार बादल जाता है जैसे के। ......
*दूध को दुखी करो तो दही बनता है|
*दही को सताने से मक्खन बनता है|*
*मक्खन को सताने से घी बनता है|*
*दूध से महंगा दही है,दही से महंगा मक्खन है,और मक्खन से महंगा घी है|*
*किन्तु इन चारों का रंग एक ही है सफेद|*
*इसका अर्थ है बाऱ- बार दुख और संकट आने पर भी जो इंसान अपना रंग नहीं बदलता,समाज में उसका ही मूल्य बढ़ता है|*
: जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है
मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ। ...... हासिल कहाँ नसीब
से होती हैं।
......मगर वहाँ तूफान भी
हार जाते हैं।
..जहाँ किश्तियाँ जिद
पर होती हैँ।
"दु:ख" और "तकलीफ"
खुदा की बनाई हुई
वह प्रयोगशाला है l
जहां आपकी काबलियत
और आत्मविश्वास को
परखा जाता है l
यदि आप किसी चीज के बारे में सोचने में बहुत अधिक समय लगाते हैं , तो आप उसे कभी कर नहीं पाएंगे।
*जीवन" में "तकलीफ़" उसी को आती है, जो हमेशा "जवाबदारी" उठाने को तैयार रहते है,*
*और जवाबदारी लेने वाले कभी हारते नही, या तो "जीतते" है, या फिर "सिखते" है.*
*अभिमन्यु की एक बात बड़ी शिक्षा देतीं हैं ...*
*" हिम्मत से हारना,*
*पर*
*हिम्मत मत हारना "...*
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।
*क्या खूब लिखा है किसी ने-*
*लाख दलदल हो,*
*पाँव जमाए रखिये;*
*हाथ खाली ही सही,*
*ऊपर उठाये रखिये;*
*कौन कहता है छलनी में,*
*पानी रुक नहीं सकता;*
*बर्फ बनने तक,*
*हौसला बनाये रखिये

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