जी हां दोस्तों ये बात सुनने में एक अजीब सी मालूम होती है लेकिन ये सच है लेकिन उन्होंने ये सब बहुत ही मजबूरी में किया और और ज़िन्दगी की जंग जीत गए । और किसी ने सच ही कहा है के जिनके हौसले बुलंद उनको कोई भी नही हरा सकता । और जब तक इंसान अपने मन से हार नही मान लेता बह तब तक नही हार सकता। यहाँ तक की मौत भी उसे नही हरा सकती । दोस्तों इतिहास गबा है के लोगो ने जिंदगी को जीतने के लिए कई कठीन परिस्थतियो का सामना किया है । और आज हम आपको ऐसी ही एक दुर्घटना के बारे में बताने बाले है जो इंडीज़ की बर्फीली पहाड़ियों में हुई थी । जिस में जिन्दा बचे लोगो को 72 दिनों तक बिना खाने पीने की कोई सामग्री के रहना पड़ा था। और उस दुर्घटना में घायल हुए साथियो को अपने ही सामने तड़प तड़प कर मरते हुए देखा था । यहाँ तक की उनको अपने मरे हुए साथियो की लासो को भी खाना पड़ा था ।
अब में आपको बताता हूं के ये घटना कैसे हुई और कहाँ हुई ..=
दोस्तों सन 1972 में एक ऐसी दुर्घटना हुई
"फ्लाइट डिसास्टर जा मिनेकाल ऑफ़ इंडीज़ "
के नाम से फेमस है जिसके बारे में हम सायद अंजान है । ये दुर्घटना स्बाग पूरबी के रग्बी टीम के उन दो खिलाड़ियों के नाम से भी जानी जाती है
जिन्होंने अपने बुलन्द हौसले और साहस से मौत को भी मात दे दी और अपने चौदह साथियो की भी जिंदगी को बचाया । दोस्तों ये दर्दनाक हादसा 14 अक्टूबर 1972 को हुआ था । और उस में शिकार हुई उर्गबे की " ओल्ड करश्चण रागबे टीम " दरर्सल ये टीम चीली के सेंटियागो सहर में मैच खेलने जा रही थी ।
ये टीम इर्गबे एयरफोर्स कंपनी के अधीकारी खिलाड़ी और उनके परिबार के साथ चीली में जा रही थी । पिलेन【हबाई जहाज़】 इन सब लोगो की मौजूदगी में इंडीज़ परबत के ऊपर से गुजर रहा था
। पिलेन में कुल 45 लोग सबार थे । उड़ान भरने के कुछ देर बाद है ही अचानक मौसम खतरनाक तरीके से खराब होने लगा ।
। एंडीज़ के बर्फीले पहाड़ो और बादलो के खराब होने से पाइलेट को कुछ साफ़ नज़र नही आ रहा था । मौसम खराब होने के कारण पाइलेट को सम्भावित खतरा नज़र आने लगा । जमीन से 1400 हजार मीटर की ऊँचाई पर पाइलेट अपने पिलेन को सही तरह से सभाल नही पा रहा था
और अचानक ही बह पिलेन एक सबसे ऊंची चोटी एंडीज़ परबत से टकरा गया
। जो बिमान कुछ देर पहले हबा में उड़ रहा था अब बो उस चोटी से टकराने के कारण टूट फुट गया और धू धू कर कर के जलने लगा
। और एंडीज़ परबत की बर्फीली चोटियों में कही खो गया । इस भयानक हादसे में 18 लोगो की मौत हो गई बाकि बचे 27 लोग ।
ये लोग जैसे तैसे बच तो गए लेकिन एंडीज़ परबत की हड्डियों को भी ग्लादेने बाली ठंड में उनका जीबन मौत से भी बत्तर साबित हो रहा था । उनके लिए अब अपना जीबन में बहुत ही खतरनाक साबित हो रहा था
लेकिन एंडीज़ की बड़ी बर्फीली पहाड़ी में उस पिलेन का रंग भी सफ़ेद होने के कारण घास के मैदान में सुई ढूढ़ने जैसा था ।
उन्हें ढूढ़ने का ये ओप्रेसन लगातार 10 दिन तक चला । लेकिन उनके ना मिलने के कारण थक हार कर ये ओप्रेसन 11 दिन बंद करना पड़ा और ये मान।लिया गया के अब उन की मौत हो गई होगी । क्यों की एंडीज़ परबत की इतनी खतरनाक ठंड में और ना कोई खाने पीने के साधन के इतने दिन जिन्दा रहना मुमकिन नही था । बाकि बचे 27 लोगो में से भी कुछ लोग इस ठंड के कारण मर गए । इनमे से भी बचे कुछ लोगो ने अपने पास कुछ बचे खाने के सामान को सभी में थोड़ा थोड़ा बॉट लिया ताके ज्यादा दिन चल सके । और पानी की कमी को दूर करने के लिए पिलेन में से एक ऐसी मेटल पिलेट को निकाला जो धुप में जल्दी गर्म हो सके ।
फिर उस पर बो बर्फ को रखते और उस के पिघलने पर उस पानी को पीते । इस तरह उन्होंने अपने पानी का तो इंतज़ाम कर लिया लेकिन बो थोड़ा सा खाना आखिर कब तक चलता ? जब बो खाना भी खत्म हो गया तो उन्हें कुछ रास्ता अपनी भूख मिटाने का नज़र नही आया तब उन्होंने अपने मरे हुए साथियो की लाशों को छोटे छोटे टुकड़ों में काटा और उन्हें खाना सिरु कर दिया । अब हर दिन उनका मौत ओर बढ़ रहा था अब ये केबल 16 लोग ही जिन्दा बच रहे थे । मदत की अब उन्हें कोई उम्मीद नही दिख रही थी अब तो उन्हें लगने लगा था के अब कोई भी मदत हमारे लिए नही आएगी अब तो हमे यही मारना है । लेकिन उनमें से दो खिलाड़ियों ने सोचा के यहाँ पड़े पड़े मारने से तो अच्छा है के मदत के लिए कहि जाया जाये । और खुद को और अपने साथियों को बचाया जाए । लेकिन 60 दिन से इस मुसीबत को झेल रहे ये लोग इतने कमजोर हो गए की अब तो चलना भी मुश्किल हो रहा था
लेकिन उन दोनों ने हिम्मत की और बाकि साथियो को उसी स्थान पर छोड़ कर मदत की तलाश में चल दिए । बो दोनों मदत की तलाश में चल दिए और 12 दिन की लगातार महनत और मसक्कत के बाद उन्होंने गजब का कमाल कर दिखाया । बो दोनों एंडीज़ परबत को हराते हुए परबत के पार चीली के आबादी बाले छेत्र में पहुच गए । और जहाँ दोनों ने रेक्सयो टीम को अपनी मुसीबत के बारे बताया और अपने साथियों के बारे में बताया ।
तो उस टीम ने तुरंत उन के साथियो को खोज निकाला और उन्हें अपने स्थान पर पहुचा दिया गया ।
तो दोस्तों इस तरह उन दोनों ने खुद की जान तो बचाई बल्कि अपने साथियों के लिए एक बरदान साबित हुए ।
बाद में पेरोडो ने इस खतरनाक हादसे को पर एक किताब भी लिखी और एक alive नाम से एक हॉलीबुड फिल्म भी बनाई । जिसे आप youtube में अलाइव नाम से देख सकते है ।
तो दोस्तों ये है बो सच्ची कहानी जिस में उन्होंने अपने आप को जिन्दा रखने के लिए कितने कठिन प्रयास किये । और उन खिलाड़ियों को ये कारनामा उनके लिए हमेसा के लिए यादगार रहेगा ।
जिन्होंने अपने बुलन्द हौसले और साहस से मौत को भी मात दे दी और अपने चौदह साथियो की भी जिंदगी को बचाया । दोस्तों ये दर्दनाक हादसा 14 अक्टूबर 1972 को हुआ था । और उस में शिकार हुई उर्गबे की " ओल्ड करश्चण रागबे टीम " दरर्सल ये टीम चीली के सेंटियागो सहर में मैच खेलने जा रही थी ।
ये टीम इर्गबे एयरफोर्स कंपनी के अधीकारी खिलाड़ी और उनके परिबार के साथ चीली में जा रही थी । पिलेन【हबाई जहाज़】 इन सब लोगो की मौजूदगी में इंडीज़ परबत के ऊपर से गुजर रहा था
। पिलेन में कुल 45 लोग सबार थे । उड़ान भरने के कुछ देर बाद है ही अचानक मौसम खतरनाक तरीके से खराब होने लगा ।
। एंडीज़ के बर्फीले पहाड़ो और बादलो के खराब होने से पाइलेट को कुछ साफ़ नज़र नही आ रहा था । मौसम खराब होने के कारण पाइलेट को सम्भावित खतरा नज़र आने लगा । जमीन से 1400 हजार मीटर की ऊँचाई पर पाइलेट अपने पिलेन को सही तरह से सभाल नही पा रहा था
और अचानक ही बह पिलेन एक सबसे ऊंची चोटी एंडीज़ परबत से टकरा गया
। जो बिमान कुछ देर पहले हबा में उड़ रहा था अब बो उस चोटी से टकराने के कारण टूट फुट गया और धू धू कर कर के जलने लगा
। और एंडीज़ परबत की बर्फीली चोटियों में कही खो गया । इस भयानक हादसे में 18 लोगो की मौत हो गई बाकि बचे 27 लोग ।
ये लोग जैसे तैसे बच तो गए लेकिन एंडीज़ परबत की हड्डियों को भी ग्लादेने बाली ठंड में उनका जीबन मौत से भी बत्तर साबित हो रहा था । उनके लिए अब अपना जीबन में बहुत ही खतरनाक साबित हो रहा था
बहाँ उनके पास दूर दूर तक बर्फ के सिवाय और कुछ भी नही था । हादसे की जानकारी मिलते ही तुरंत उर्गबे की सरकार में उन्हें ढूढ़ने का प्रयत्न सिरु कर दिया ।
लेकिन एंडीज़ की बड़ी बर्फीली पहाड़ी में उस पिलेन का रंग भी सफ़ेद होने के कारण घास के मैदान में सुई ढूढ़ने जैसा था ।
उन्हें ढूढ़ने का ये ओप्रेसन लगातार 10 दिन तक चला । लेकिन उनके ना मिलने के कारण थक हार कर ये ओप्रेसन 11 दिन बंद करना पड़ा और ये मान।लिया गया के अब उन की मौत हो गई होगी । क्यों की एंडीज़ परबत की इतनी खतरनाक ठंड में और ना कोई खाने पीने के साधन के इतने दिन जिन्दा रहना मुमकिन नही था । बाकि बचे 27 लोगो में से भी कुछ लोग इस ठंड के कारण मर गए । इनमे से भी बचे कुछ लोगो ने अपने पास कुछ बचे खाने के सामान को सभी में थोड़ा थोड़ा बॉट लिया ताके ज्यादा दिन चल सके । और पानी की कमी को दूर करने के लिए पिलेन में से एक ऐसी मेटल पिलेट को निकाला जो धुप में जल्दी गर्म हो सके ।
फिर उस पर बो बर्फ को रखते और उस के पिघलने पर उस पानी को पीते । इस तरह उन्होंने अपने पानी का तो इंतज़ाम कर लिया लेकिन बो थोड़ा सा खाना आखिर कब तक चलता ? जब बो खाना भी खत्म हो गया तो उन्हें कुछ रास्ता अपनी भूख मिटाने का नज़र नही आया तब उन्होंने अपने मरे हुए साथियो की लाशों को छोटे छोटे टुकड़ों में काटा और उन्हें खाना सिरु कर दिया । अब हर दिन उनका मौत ओर बढ़ रहा था अब ये केबल 16 लोग ही जिन्दा बच रहे थे । मदत की अब उन्हें कोई उम्मीद नही दिख रही थी अब तो उन्हें लगने लगा था के अब कोई भी मदत हमारे लिए नही आएगी अब तो हमे यही मारना है । लेकिन उनमें से दो खिलाड़ियों ने सोचा के यहाँ पड़े पड़े मारने से तो अच्छा है के मदत के लिए कहि जाया जाये । और खुद को और अपने साथियों को बचाया जाए । लेकिन 60 दिन से इस मुसीबत को झेल रहे ये लोग इतने कमजोर हो गए की अब तो चलना भी मुश्किल हो रहा था
लेकिन उन दोनों ने हिम्मत की और बाकि साथियो को उसी स्थान पर छोड़ कर मदत की तलाश में चल दिए । बो दोनों मदत की तलाश में चल दिए और 12 दिन की लगातार महनत और मसक्कत के बाद उन्होंने गजब का कमाल कर दिखाया । बो दोनों एंडीज़ परबत को हराते हुए परबत के पार चीली के आबादी बाले छेत्र में पहुच गए । और जहाँ दोनों ने रेक्सयो टीम को अपनी मुसीबत के बारे बताया और अपने साथियों के बारे में बताया ।
तो उस टीम ने तुरंत उन के साथियो को खोज निकाला और उन्हें अपने स्थान पर पहुचा दिया गया ।
तो दोस्तों इस तरह उन दोनों ने खुद की जान तो बचाई बल्कि अपने साथियों के लिए एक बरदान साबित हुए ।
बाद में पेरोडो ने इस खतरनाक हादसे को पर एक किताब भी लिखी और एक alive नाम से एक हॉलीबुड फिल्म भी बनाई । जिसे आप youtube में अलाइव नाम से देख सकते है ।
तो दोस्तों ये है बो सच्ची कहानी जिस में उन्होंने अपने आप को जिन्दा रखने के लिए कितने कठिन प्रयास किये । और उन खिलाड़ियों को ये कारनामा उनके लिए हमेसा के लिए यादगार रहेगा ।















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