जीतने के बल की नही अक्ल की जरूयत होती है / चार ठग की कहानी / The power of winning is not required by wisdom or the story of four thugs - मस्त मस्त हिंदी कहानियाँ

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शनिवार, 26 सितंबर 2020

जीतने के बल की नही अक्ल की जरूयत होती है / चार ठग की कहानी / The power of winning is not required by wisdom or the story of four thugs

 


एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है, 
कोई जी लेता है जिंदगी किसी की कट जाती है।




दोस्तो आज हम कितने साल के हो गए ये हर इंसान अपने बारे में जानता है ,
लेकिन कितना और जियेंगे ये किसी को पता नही ।  दोस्तो मौत और ज़िन्दगी का कोई भरोसा नही कब ये जीबन की सांस की डोर टूट जाये कब जीबन के बक्त की घड़ी थम जाए ये किसी को नही पता । तो ऐसे में जिदगी जिंदगी को  जियो खुलकर जियो अगर जिंदगी में कोई टेंसन हो तो उसे शेएर करो अपने माता पिता से दोस्तो से या अपने पार्टनर साथ जिस से टेंसन का हल निकले ओर टेंसन हल्की हो । दोस्तो जिन्दगो को जीने के लिए आत्मनिर्भर और आत्मबिशबास बहुत जरूरी है दोस्तो अगर आत्म बिसबास इंसान के अंदर हुआ तो उस के लिए किसी पहाड़ को तोड़कर दूसरी जगह करना भी आसान लगेगा । और बो हर काम को कर सकता है । एक बात और कभी भी दूसरों के भरोसे में आकर कोई काम ना करे ...!
आप तो अपने ऊपर बिसबास करो बस ।
सुनो सब की लेकिन करो मन की । आपके मन मे जब तक ये बात है के मैं सही हु और ये काम मैं  कर सकता हु तब तक आपकी जीत है । जब आप के मन ने हार मान ली तो समझो के आप हार गए । चाहे आप कोई काम करो या ना करो । दोस्तो आज मैं आपको कुछ इस तरह ही एक कहानी लेकर आया हु  जो कि  जिसे आप पड़ कर सायद हसेंगे भी और उस से कुछ सिक्छा भी प्राप्त करेंगे । चलिए दोस्तो अपनी उस कहानी पर आता हूं ।
दोस्तो एक गांब में एक बूढ़ा ब्यक्ति रहता  था जिस का नाम था । दीनदयाल ....
दीनदयाल बहुत ही चालाक किस्म का इंसान था लेकिन बो दुसरो की बातों पर कभी कभी बिसबास कर लिया करता था जिस से बो कभी ठग भी जाता था   बो बुजुर्ग जरूर था लेकिन उस के सरीर में अब भी इतनी फुर्ती थी के जब बो चलता था तो जबान आदमी भी उस की चाल में पीछे रह जाये करते थे । दीनदयाल अपने एक छोटे से परिबार के साथ रहता था उस के परिबार में कुल चार सदस्य थे दो तो दीनदयाल और उस की पत्नी और एक उस का लड़का  और उस की  बच्ची । एक दिन दीनदयाल ने पड़ोस बकरी बाले से थोड़ा सा बकरी का दूध मांगा  लिया  तो उस ने दीनदयाल को फटकार कर मना कर दिया और कुछ ऐसी भी बाते बोल दी जिस से अपने बह मन ही मन प्रण कर बेठा के अब तो साली बकरी ही लानी है । चाहे कुछ भी हो जाये मैं आज एक बकरी ही खरीद कर मानूँगा



 ! बस फिर क्या था बो बकरी खरीदने दूसरे गांब के लिए चल दिया । और अपने घर से 20 -  25  किलोमीटर दूर पैदल पैदल चल कर बो एक बकरी खरीदने में कामयाब हुआ ।
जब बो वँहा  से आ रहा था तब चार ठगों की नज़र उस पर पड़ी । और उनमे से एक  बोला
:- रे बापू बकरी तो घनी जोर की है  भाइयो इस बाबे से तो ए बकरी मानह घाड़नी है ।
दूसरा बोला :- अरे हाँ भाइयो चलो इस बुजुर्ग को बेबकूफ बनाते है और इस बाकरी को इस से लूटते है ।
:- तीसरा बोला :-आ रे  इस बुड़ाऊ को मैं अच्छी तरह जानता हूं ये दीनदयाल है बहुत चालाक बुड्ढा है ये किसी के बाप पर भी बेबकूफ नही बन सकता । चौथा बोला :- रे तुम लोग कोहू चिंता ना करो मेरे पास एक ऐसा आइडिया है के बुड्डा अपने आप इस बकरी को हमारे हबाले कर देगा बो भी बिना किसी लड़ाई झगड़े के .....!!!!!
  तीनो उस की तरफ देखे और उसने अपना पिलान बताया ।
दोस्तो उस का पिलान बाकी दमदार था के बो बुजुर्ग अपनी बकरी को हस्ते हस्ते उसे दे गया अब मैं बताता हूं के क्या पिलान बनाया  था  उन्होंने...👌👌
बो चारो चार किलोमीटर तक फैल गए यानी जिस रास्ते से बो बुजुर्ग गुजर रहा था तो बो उस रास्ते  पर एक एक किलोमीटर दूर चले गए । सबसे पहले उस बुजुर्ग को एक ठग मिला और बुजुर्ग के पास आकर बोला :- अरे काका नमस्ते
बुजुर्ग सोचते हुए ..... नमस्ते
अरे काका आप का कुत्ता तो बड़ा सुंदर है अरे बाह कितना प्यारा लग रहा है ।
बुजुर्ग ने उस को गौर से देखा और सोचने लगा के पागल तो नही है ये और बोला के अबे भड़बे तुझे ये कुत्ता दिखता है पागल तो नही हो गया है तू ?
तो ठग बोला अरे काका क्या बोल रहे हो ये कुत्ता है ....! आपकी आंखें तो ठीक है ना ...?
तो दीनदयाल को गुस्सा आया और गुस्से में बोला के हॉ कुत्ता है तुझे क्या चले जा नही तो साले पसलियो में हबा भर दूंगा ।  कुत्ता बता रहा है साला हमे बेबकूफ समझ रहा है ।
दीनदयाल उसे छोड़ कर आगे बढ़ जाता है और चलते चलते बो एक किलोमीटर दूर पहुच जाता है तो उसे दूसरा ठग मिल जाता है ठग उसे देखकर उस के पास आता है और बोलता है
रे काका प्रणाम ....
दीनदयाल उसे देखता है और बोलता है प्रणाम ।
तो बो ठग बोलता है के काका तुम्हारा कुत्ता तो घनी जोर का है । कितने का लाया इसे । काठता तो नही है न ये...?
दीनदयाल उस की तरफ गौर से देखता है के इसे कुछ दिख रहा है या नही ।
फिर बोलता है के तुझे कुत्ता दिख रहा है ये ....
अबे तेरी आखो में ऑइल डाल के आ अंधे ये मेरी बकरी है पागल समझ रहे हो क्या तुम मुझे ???
बो ठग बकरी का नाम सुन कर जोर जोर से हँसने लगता है  और बोलता है बकरी....????
अरे बाबा तुम्हारा दिमाक तो खराब नही हो गया इसे किसी के सामने बोल और मत देना के ये बकरी है बरना लोग आपको पागल समझेंगे ।
दीनदयाल को गुस्सा आया और बो उसे भासन सुनाते हुए आगे बढ़ गया  । जब बो एक किलोमीटर दूर पहुच गया तो उसे तीसरा ठग बोला
रे बाबा कहा जा रहे हो ???
अपने घर जा रहा हु बेटा ।
रे ये कुत्तो कहा से लायो भारी अच्चो लाग रायो ।
दीनदयाल को गुस्सा आया पर कुछ ना बोला और आगे बढ़ लिया लेकिन अब  बो उस बकरी को बार बार देखता है और फिर अपने सिर को खुजराता । बो बार बार उस के मुँह और उस के थून और  बार बार कहता के ये बकरी है ये नालायक झूठे है  फिर सोचता के यार जो भी  मिल रहा है बो यही बोल रहा है ।
बो फिर चल दिया  ! फिर एक किलोमीटर चलने के बाद उसे चौथा ठग मिला
और बोला के रे बाबा के हाल है । कहा जा रहे हो  अपने कुत्ते के साथ ।
अब तो दीनदयाल से भारी हो गई और गुस्से में उससे बोला के तुझे ये कुत्ता दिख रहा है क्या । ये मेरी बकरी है जो अभी ले कर आया हूं ।
चौथे ठग ने बहुत डेंजर एक्टीनग की रे बाबा पागल हो गए हो क्या गांब बाले तो दूर घर बाले भी तुम्हे अपने घर मे घुसने नही देंगे अगर तूने इसे बकरी बताया तो
ये कुत्ता है मैं कुत्ता और बकरी में अच्छी तरह फर्क जानता हूं ।
दीनदयाल ने अब मान लिया के ये कुत्ता है क्यो की इतने आदमी नही बोल सकते ऐसा ।
अब दीनदयाल सोचने लगा के अगर मैं इस को घर ले जाऊंगा तो मेरे बच्चे और बीबी तो मुझे पागल समझेंगी । तो बो उस बकरी की रस्सी को उस इस चौथे ठग के हाथों में थमाकर बोला के ये कुत्ता आपको अच्छा लग रहा है ना तो कृपया कर के आप ही इसे ले लो । इतना कह कर बह अपने गांब फिर की ओर चल दिया । और अपने घर आ गया ।
 यानी
दीनदयाल हिम्मत हार गया क्यो की उस का आत्मबिशबास कमजोर था । तो दोस्तो असली में तो आपको इस कहानी से ये समझाना चाहता हु के इंसान का आत्मबिशबास जब तक जिंदा है तब तक इंसान जिंदा है यानी बो इस जमाने से लड़ने की ताखत रखता है ।  फिर बो इस जिंदगी को अपने दम पर जीने का साहस रखता है और दोस्तो जिस का आत्मबिशबास कमजोर है बो या तो दूसरों के टुकड़ो पर जियेगा या भीख मांगेगा । तो दोस्तो हिम्मत मत हारो कोई भी काम हो अगर बो काम तुम्हारे लायक है तो ना ही तो समय का इंतज़ार करो और ना ही किसी सलाहकार का । बस उसे कर डालो , तो एक नया एक बार तो जरूर कामयाबी हासिल होगी । 

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