यादे कुछ बचपन की . .. .
इस अजनबी सी दुनिया में लिया था मेने जब जनम !!
तभी से खुआइसे बढ़ती
गई और बढ़ते गए मेरे सितम !
हर पल खुसी से जीते थे लगता था सब कुछ अपना सा
आज उन पालो को याद करे तो लगता है सब एक सापना सा
रहते थे बे फ़िक्र जहां में
आसाँ थी हर एक मुश्किल!!
लगता था सब कुछ अपना सा हर दम खुस रहता था दिल!
खोये रहते थे हर बक्त फ़िज़ा में छोटा लगता था ये संसार !!
ना जानते थे नफरत को हम रहता था हर धर्म से प्यार !
दिल से हम थे बड़े आमीर चलते थे हमारे भी जहाज !!
खान पीना भूल बैठते ना होता था दौलत का हिसाब !
इस अजनबी सी दुनिया में लिया था मेने जब जनम !!
तभी से खुआइसे बढ़ती
गई और बढ़ते गए मेरे सितम !
हर पल खुसी से जीते थे लगता था सब कुछ अपना सा
आज उन पालो को याद करे तो लगता है सब एक सापना सा
रहते थे बे फ़िक्र जहां में
आसाँ थी हर एक मुश्किल!!
लगता था सब कुछ अपना सा हर दम खुस रहता था दिल!
खोये रहते थे हर बक्त फ़िज़ा में छोटा लगता था ये संसार !!
ना जानते थे नफरत को हम रहता था हर धर्म से प्यार !
दिल से हम थे बड़े आमीर चलते थे हमारे भी जहाज !!
खान पीना भूल बैठते ना होता था दौलत का हिसाब !
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें