- : आहा जिंदगी :-
या रब ना ले इतना सख्त इम्तहान मेरा , मै तो अभी नादान हु !!
जिस उम्र में खुलकर बशर की जाती है जिंदगी , मै उस उम्र में परेसान हु !
इम्तहान ले रहा है मेरा , या है किसी गुनाह की साजा ?
या रब जो भी हो , अब तो दे दो मेरी जिंदगी के चन्द
लम्हो में खुसयो की फ़िज़ा !
खुशियां जैसे छिन सी गई मुझसे , मै जैसे बीरान हु !!
या रब अब रहम कर मुझपर क्यों की मै भी एक इंसान हु !
छा गया है मेरी जिंदगी में अब हर जगह आंधेरा !!
या रब दुआ मांगता हु तुझसे , मेरी ज़िन्दगी में लादे
फिर बो सबेरा !
जिंदगी जिए जा रहा हु इसी हालात में !!
क्या पता खुसी मिल जाये बाकि कुछ लम्हात में !

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