एक चालाक बादशाह और तीन बजीर की कहानी / लोग गलतियां बहुत निकालेंगे - मस्त मस्त हिंदी कहानियाँ

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रविवार, 1 नवंबर 2020

एक चालाक बादशाह और तीन बजीर की कहानी / लोग गलतियां बहुत निकालेंगे

किसी क्या खूब कहा है .... के मै होसियार था जो सारी दुनिया को बदलने चला था ! अब में समझदार हो गया हु जो खुद को बदल रहा हु !!
एक बादशाह था जो बहुत ही चलाक और रहम दिल था ! उसकी जनता उस से बड़ी ही खुस थी उसके पास तीन बजीर थे जो अपने काम का जिम्मा एक दूसरे पर डालते थे उनमे ! एक दिन बादशाह ने एक सड़क बनबाई जो बहुत ही सुंदर थी
अब राजा ने उनको उस सड़क का निरक्छन करने के लिए एक एक बजीर को इस सड़क को देखने के लिए भेजा ! एक बजीर गया और सड़क का मुहाजरा कर के आया !
फिर राजा से बोला बदशाह सलामत सड़क बहुत अच्छी है लेकिन सड़क किनारे एक थोड़ा सा कचरा पड़ा हुआ है अगर बह कचरा बहा से उठ जाये तो बहुत अच्छा नजर आये ! बादशाह ने उस को कहा के और कुछ नजर नहीं आया तो बजीर ने कहा के बस बादशाह सलामत यही कमी रह गई है बादशाह अपनी गर्दन हलाते हुए बोलते है ठीक है ! और दूसरे बजीर को जाने की बोलते है के आप जाकर देख के आओ हमरी सड़क में कोई कमी तो नहीं है दूसरा बजीर उस सड़क का मुहाजरा करने चल देता और कुछ देर बाद आता है बो भी यही बोलता है के सड़क तो बहुत अच्छी है लेकिन एक जगह थोड़ा कचरा पड़ा था अगर बह कचरा उठ जाये तो सड़क में चार चाँद लग जाये ! बादशाह ने फिर तीसरे को भेजा और बह उस सड़क का निरक्छन करने गया तो उस को बहुत देर लग गई जब बह बहा आया तो उसके कपडे बहुत गंदे थे और उस के हाथ में एक थैला था जिसमे कुछ भरा हुआ था ! उसने बादशाह से कहा बादशाह सलामत माफ़ी चाहूंगा देर से आने के लिए , सड़क बहुत अच्छी है लेकिन सड़क पर एक जगह कुछ कचरा पड़ा हुआ था और बो सारी सड़क की खूबसूरती को खराब कर रहा था तो मैंने उसे साफ कर दिया और उसे साफ करने में ही मुझे इतना बक्त लग था और जब में उसे साफ कर रहा था तो उस कचरे के किनारे पर मुझे ये थैला भी मिला है जो सायद किसी सड़क बनाने बाले मज़दूर का रह गया होगा ! बादशाह बोला के बो कचरा मैंने ही सड़क किनारे डालबाया था ताकि में तुम तीनो में से कोई अच्छा बजीर चुन सकू और ये थैला मैंने ही उस कचरे के पास डाला था इस थैले में वहुत सारा धन है जो आपके बादशाह उस की तरफ मुस्कुराता हुआ बड़ा और उस की पीठ थपथपाई और बोला के ये मेरा सबसे अच्छा वज़ीर है किसी क्या खूब कहा है .... के मै होसियार था जो सारी दुनिया को बदलने चला था ! अब में समझदार हो गया हु जो खुद को बदल रहा हु !! एक बादशाह था जो बहुत ही चलाक और रहम दिल था ! उसकी जनता उस से बड़ी ही खुस थी उसके पास तीन बजीर थे जो अपने काम का जिम्मा एक दूसरे पर डालते थे उनमे ! एक दिन बादशाह ने एक सड़क बनबाई जो बहुत ही सुंदर थी अब राजा ने उनको उस सड़क का निरक्छन करने के लिए एक एक बजीर को इस सड़क को देखने के लिए भेजा ! एक बजीर गया और सड़क का मुहाजरा कर के आया ! फिर राजा से बोला बदशाह सलामत सड़क बहुत अच्छी है लेकिन सड़क किनारे एक थोड़ा सा कचरा पड़ा हुआ है अगर बह कचरा बहा से उठ जाये तो बहुत अच्छा नजर आये ! बादशाह ने उस को कहा के और कुछ नजर नहीं आया तो बजीर ने कहा के बस बादशाह सलामत यही कमी रह गई है बादशाह अपनी गर्दन हलाते हुए बोलते है ठीक है ! और दूसरे बजीर को जाने की बोलते है के आप जाकर देख के आओ हमरी सड़क में कोई कमी तो नहीं है दूसरा बजीर उस सड़क का मुहाजरा करने चल देता और कुछ देर बाद आता है बो भी यही बोलता है के सड़क तो बहुत अच्छी है लेकिन एक जगह थोड़ा कचरा पड़ा था अगर बह कचरा उठ जाये तो सड़क में चार चाँद लग जाये ! बादशाह ने फिर तीसरे को भेजा और बह उस सड़क का निरक्छन करने गया तो उस को बहुत देर लग गई जब बह बहा आया तो उसके कपडे बहुत गंदे थे और उस के हाथ में एक थैला था जिसमे कुछ भरा हुआ था ! उसने बादशाह से कहा बादशाह सलामत माफ़ी चाहूंगा देर से आने के लिए , सड़क बहुत अच्छी है लेकिन सड़क पर एक जगह कुछ कचरा पड़ा हुआ था और बो सारी सड़क की खूबसूरती को खराब कर रहा था तो मैंने उसे साफ कर दिया और उसे साफ करने में ही मुझे इतना बक्त लग था और जब में उसे साफ कर रहा था तो उस कचरे के किनारे पर मुझे ये थैला भी मिला है जो सायद किसी सड़क बनाने बाले मज़दूर का रह गया होगा ! बादशाह बोला के बो कचरा मैंने ही सड़क किनारे डालबाया था ताकि में तुम तीनो में से कोई अच्छा बजीर चुन सकू और ये थैला मैंने ही उस कचरे के पास डाला था इस थैले में वहुत सारा धन है जो आपके लिए इनाम है बादशाह उस की तरफ मुस्कुराता हुआ बड़ा और उस की पीठ थपथपाई और बोला के ये मेरा सबसे अच्छा वज़ीर है आज से मेरे सारे काम ये ही सभालेगा .... तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही सीखने को मिलता है के हमारे कामो में नक़ल लगाने बाले बहुत से लोग मिल जायेंगे लेकिन उन को सही करने बाले बहुत कम मिलेंगे ! धन्यबाद

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